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संसाधनों की कमी से विद्यार्थियों का भविष्य अंधकार मय

समस्याओं को साझा करते विद्यार्थी

देवघर जिले के ‌सारठ प्रखंड अंतर्गत बोचबांध पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय करमाटांड़ में संसाधनों की घोर‌ कमी है। इससे विद्यार्थियों का भविष्य अंधकार में है।सरकार प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था दुरूस्त करने की बातें करती है। अनेक विद्यालयों में साधन व संसाधन जुटाए गए हैं। लेकिन 2007-08 में उत्क्रमित इस विद्यालय में साधन व संसाधन दोनों का घोर अभाव है। इसमें आधुनिक शिक्षा के लिए कंप्यूटर रूम नहीं है। इतना ही नहीं, विद्यार्थियों के ज्ञान वृद्धि के लिए लाइब्रेरी नहीं है। सुरक्षा के लिए बाउंड्री वॉल नहीं है। शौचालय जर्जर और‌ अनुपयोगी है। तीन कमरे का भवन भी जर्जर है। बारिश के दिनों कक्षा में पानी टपकता है। इतना‌ ही नहीं भीषण गर्मी में भी चापाकल बंद पड़ा है। इन सभी बातों का खुलासा जागरण टीम के पड़ताल से हुआ है।कंप्यूटर शिक्षा नहीं: मीना कुमारी, पीयूष कुमार, प्रीतम कुमार, मुन्ना कुमार व अन्य कहते हैं कि यहां न तो कंप्यूटर रूम है और‌ कंप्यूटर शिक्षा व्यवस्था। इस शिक्षा के‌‌ अभाव में विद्यार्थियों को ककहरा‌ भी नहीं आता है। जबकि वर्तमान समय में कंप्यूटर शिक्षा की अहमियत क्या है। इस बात से सभी लोग वाकिफ हैं। संसाधनों के अभाव में ही अभिभावक सरकारी विद्यालय छोड़कर निजी विद्यालयों में अपने बच्चों को दाखिल करते हैं। जबकि वहां आर्थिक शोषण ही शोषण होता है।शिक्षक,भवन, बाउंड्री वाल की बड़ी समस्या: तीन शिक्षकों के भरोसे यहां की शिक्षा व्यवस्था टिकी हुई है। भवन व शिक्षकों के अभाव में संयुक्त कक्षाओं का संचालन किया जाता है। तीन कमरे का भवन में पानी बरसात के दिनों में टपकता है। बाउंड्री वॉल के अभाव में बच्चे असुरक्षित महसूस करते हैं। मवेशी कुत्ते आदि का आना-जाना परिसर में लगा रहता है। शौचालय व पेयजल का अभाव: दीपांशु कुमार, प्रिंस कुमार,अभिषेक कुमार, देव कुमार आदि बच्चे करते हैं कि दशकों पुराना शौचालय जर्जर और अनुपयोगी हो गया है। आपातकालीन स्थिति में बहुत परेशानी होती है। चापाकल बंद पड़ा है। बोतल में पानी लाना पड़ता है या फिर घर जाकर प्यास बुझाते हैं।नया सत्र पर पाठ्य सामग्री नहीं: एक अप्रैल से शैक्षणिक सत्र 2026-27 प्रारंभ हो गया है। लेकिन विद्यार्थियों को अब तक कॉफी नई किताबें आदि नसीब नहीं हुई हैं। यह सब सरकारी अव्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है।पुस्तकालय नहीं: 2007-08 में विद्यालय को उत्क्रमित कर मध्य विद्यालय बनाया है। दो दशक बीतने के बाद भी यहां लाइब्रेरी नहीं है। अनिता कुमारी, आराध्या कुमारी, रितिका कुमारी क्या कहना है कि ज्ञानवर्धन के लिए यह आवश्यक है।कुछ महीने पहले यहां प्रतिनियुक्ति हुई है। विद्यालय की समस्या की जानकारी विभाग व पंचायत को दी गई है। उम्मीद है कि समाधान जल्द होगा। मृत्युंजय कुमार सिंह, प्रभारी प्रधानाध्यापक

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