मेरी उमर बीती सारी,बुला लो वृंदावन गिरधारी पर झूमें श्रोता

श्रीमद् भागवत कथा वाचन के दौरान देवी गौर प्रिया ने कहा कि हम सब माया मोह के बंधन में बंधे अपना जीवन का कीमती समय गुजर रहे हैं। यह बातें उन्होंने देवघर जिले के एसपी माइंस के पुनर्वास स्थल बनवारी डंगाल में गुरुवार की रात प्रवचन के दौरान कही। कहा कि दुनियादारी के पीछे सभी पागल हैं। इस दौरान उनके भक्ति गीत मेरी उमर बीती सारी पर श्रोता झूम उठे।इस चक्कर में हम अपने जीवन के लक्ष्य से दूर हटते जा रहे हैं। जबकि मानव जीवन दुर्लभ है। देवता ही मनुष्य तन पाने के लिए तरसते रहते हैं। क्योंकि जितनी भी लीलाएं हुई है। देवों ने मानव शरीर धारण कर अंजाम दिया है। इसलिए इस जीवन को सार्थक बना लें। यह तभी संभव है। जब इसे श्री राधा कृष्ण की भक्ति में समर्पित कर दें। वे प्रेम और भक्ति भाव के भूखे हैं। जब उनका नाम लिया जाता है तो वह दौड़े भक्त के पास चले आते हैं। उन्हें देखने के लिए जो सक्षम है। वे आज भी उनका दर्शन कर रहे हैं। जिन्होंने श्री हरि का दर्शन कर लिया। उसकी कोई आधी अधूरी ख्वाहिश नहीं रह जाती है। इस संसार में जन्म लेने का सारा मकसद पूरा हो जाता है। आगे कहा कि कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा – यह गोस्वामी तुलसीदास जी रचित एक अत्यंत प्रसिद्ध पंक्ति है। उन्होंने भी भगवान नाम जपने की महिमा का वर्णन किया है। केवल नाम जपने से अपना कल्याण हो सकता है। वे माया मोह के सारे बंधन को काटकर जन्म मरण के चक्रव्यूह से मुक्त कर देंगे। प्रवचन के दौरान भक्ति गीत की प्रस्तुति दी। मेरी उमर बीती सारी,बुला लो वृंदावन गिरधारी। इस गीत को गा-गा कर श्रोता झूम उठे। उन्होंने आगे कहा कि हमारी उम्र एक-एक दिन करके बीतती जा रही है। हम दौलत, पुत्र पुत्री, वाहन, आलीशान बंगले आदि प्राप्त करने के लिए पागल हुए जा रहे हैं। यह सब लक्ष्य को प्राप्त करने से हमारे मन को भटकाव पैदा करते हैं। हमारे जीवन का लक्ष्य केवल और केवल ईश्वर प्राप्ति है। मौके पर अरूण महतो,नरेश महतो, जयदेव,निताय, तीर्थनाथ, गणेश,मुन्ना,जनार्दन ठाकुर, हरेराम व अन्य मौजूद थे।




