प्ले स्कूल जैसी सुविधाएं दूर की, पेयजल भी नसीब नहीं
आंगनबाड़ी केंद्रों में प्ले स्कूल के तर्ज पर बच्चों को सुविधा प्रदान करना है। लेकिन इस केंद्र में सूविधा की बातें दूर की है। उन्हें पीने का पानी भी नसीब नहीं है। इन्हीं आंगनबाड़ी केंद्रों से बच्चे निकाल कर विद्यालयों में जाएंगे। जिस आंगनबाड़ी केंद्र के कर्मियों को पानी ढोने में ही समय निकल जाता है। बच्चों का सुनहरा भविष्य कैसे गढ़ पाएंगे। यह सोचने वाली बात है। सारठ प्रखंड के बोचबांध पंचायत के आंगनबाड़ी केंद्र कर्माटांड़ में भोजन बनाने व बच्चों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए गांव से सर पर ढोकर पानी लाना पड़ता है। इतना ही नहीं छोटे-छोटे बच्चों को शौचालय के अभाव में खुले स्थान में जरूरत पड़ने पर शौच को ले जाया जाता है। इससे केंद्र में अव्यवस्था की कलई खुल गई है।प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस केंद्र का निर्माण 2013 में हुआ। इसके साथ ही पेयजल आपूर्ति के लिए समरसेबल पंप टंकी आदि लगाया गया। केंद्र के साथ ही शौचालय का भी निर्माण कराया गया। लेकिन दोनों ही सुविधा बच्चों के लिए स्वप्न बनकर रह गया है। इस संबंध में आंगनबाड़ी सेविका सुमित्रा देवी देवी कहती हैं कि शरारती तत्वों ने इस केंद्र के शौचालय के पेन में बालू भर दिया। सेफ्टी टैंक तोड़फोड़ दिया। जिससे शौचालय कोई काम का नहीं रहा। निर्जन स्थान में केंद्र अवस्थित है। इसलिए इसका समरसेबल पंप चोरी कर लिया गया। घटना के बाद ना तो जलापूर्ति के समरसेबल पंप लगाया गया और ना ही चापाकल से ही इस समस्या का समाधान किया गया। यहां कार्यरत सहायिका रीता कुमारी कहती है जलापूर्ति के अभाव में उन्हें केंद्र के समीप के गांव कटुटांड से बाल्टी सर पर रखकर पानी ढोना पड़ता है। जिससे भोजन बनता है और बच्चे पीते हैं। आपातकाल में बच्चों को शौच महसूस होने पर केंद्र से बाहर खुले में ले जाना पड़ता है। हालांकि यहां नामांकित बच्चे 30 बताया जाता हैं। लेकिन उपस्थिति नामांकन के अनुसार नहीं पाई गई।
इस केंद्र की समस्या की जानकारी विभाग को है। बच्चों की उपस्थिति धीरे-धीरे बढ़ती है। भोजन के दौरान उनकी संख्या सर्वाधिक होती है। सुमित्रा देवी, आंगनबाड़ी सेविका कर्माटांड़




