लेटेस्ट न्यूज़

बहनों ने व्रत रखकर अपने भाइयों के दीर्घजीवी होने की कामना की

देवघर जिले के चितरा कोयलांचल के ग्रामीण इलाकों में बुधवार को करम उत्सव मनाने को लेकर महिलाओं, युतियों व किशोरियों ने व्रत रखा। परंपरा अनुसार सामूहिक गीत नृत्य के साथ रात्रि जागरण होना है। कुरूम डाली के विसर्जन के साथ सुबह इसका समापन हो जाएगा।

जानकारी कि यहां के ग्रामीण इलाकों भवानीपुर, जमुआ, ताराबाद, फौजदारबांक, बरमरिया, मुर्गाबनी, खून समेत लगभग सभी गांव में धूमधाम के साथ करमा त्योहार मनाया जा रहा है।‌ राधिका, लक्ष्मी, प्रतिमा, शिक्षा,गुड़िया, अन्नू कहती है कि एक सप्ताह होने को है। स्नान करके जोरिया से सभी कर्ममेतियों ने डाली आदि में बालू भरकर लाया। उसमें अंकुरण के लिए जौ डाला। इसके साथ ही रोजाना गीत नृत्य और जौ को सींचने का सिलसिला प्रारंभ हुआ। जौ अंकुरित होकर पौधा बन गया। रात में कुरूम पेड़ की डाली को गाड़कर गीत नृत्य करेंगे। रात्रि जागरण और सुबह डाली के विसर्जन के साथ इसका समापन हो जाएगा। किशोरियों ने बताया कि यह ऐसा त्योहार है जिसमें बहनों का हिस्सा लेना अनिवार्य है। यदि वे ससुराल में रहती हैं तो उन्हें इसमें शिरकत करने के लिए आना ही पड़ता है। व्रत रख बहने अपने-अपने भाइयों के लंबी आयु की कामना करती हैं।

भाई बहन के प्यार का त्योहार ही नहीं प्रकृति पूजा भी:

करम उत्सव को भाई बहन के प्रेम का प्रतीक ही नहीं कहा जाता है। बल्कि इसे प्रकृति पूजा का प्रतीक भी माना जाता है। कुरूम पेड़ की डाली व जौ की पूजा प्रमुखता से की जाती है। कुमुद पुष्प व कमल फूल सजावट के काम में लाया जाता है। रोमा,ममता,पूजा,सुहानी, रौशनी, साक्षी, नेहा, उर्मिला, छोटी, रिया, गोपी, मानसी, गुनगुन आदि किशोरियों रहती हैं कि बीते दिन संजत किया। आज व्रत रखकर त्योहार मनाने सभी जुटे हुए हैं। यह त्यौहार भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक होने के साथ-साथ प्रकृति उपासना का भी प्रतीक है। सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार पर्यावरण के प्रमुख अंग पेड़ पौधे की भी इसमें पूजा की जाती है। इसके माध्यम से संदेश दिया जाता है कि जिसे हम पूजा करते हैं उसे काटें नहीं। पेड़ पौधे हमारे जीवन रक्षक हैं।

बच्चियां भी पीछे नहीं:

इस त्योहार में गीत नृत्य मैं बच्चे भी शामिल हो रहे हैं। उनके उत्साह का ठिकाना नहीं है। जमुआ, ताराबाद, भवानीपुर, मुर्गाबनी‌ समेत सभी गांव में उनकी भागीदारी देखी गई ।माधुरी,अर्पिता,अष्टमी, लक्ष्मी,नेहा,रिया उधर ताराबाद की नेहा, करिश्मा, शीतल, सुहाना, रूपाली कहती हैं कि वर्ष में एक बार अपने भाई के लिए व्रत रखूंगी तो कौन सी बड़ी बात है। ऐसा क्षण जीवन में बार-बार आए।

oplus_131074

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *